जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के 6 महीने पूरे, अब राष्ट्रपति शासन लागू

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22 साल बाद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है. बुधवार को छह महीने का राज्यपाल शासन समाप्त होने के बाद बुधवार की रात से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. केंद्र सरकार ने 18 दिसंबर को राज्यपाल शासन के 6 महीने पूरे होने के अगले ही दिन बुधवार को राज्य में राष्ट्रपति शासन को सहमति प्रदान कर दी थी. इससे पूर्व 1990 से अक्टूबर 1996 तक जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन रहा था.

संबंधित अधिकारियों ने बताया कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सोमवार इस संबंध में एक पत्र भेजा था, जिसके बाद केंद्रीय कैबिनेट के संज्ञान में लाया गया और राष्ट्रपति शासन लागू करने के प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया.

राष्ट्रपति शासन की अधिघोषणा के बाद संसद राज्य की विधायिका की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी या उसके प्राधिकार के तहत इसका इस्तेमाल किया जाएगा. जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान है. जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत वहां 6 महीने का राज्यपाल शासन अनिवार्य है. इसके तहत विधायिका की तमाम शक्तियां राज्यपाल के पास होती हैं.

18 जून को सरकार गिरने पर लगा था राज्यपाल शासन
राज्य में इसी साल 18 जून को भाजपा और पीडीपी से अलग होने के बाद से राज्यपाल शासन लागू हो गया था. 18 जून को निलंबित हुई विधानसभा को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 21 नवंबर को नाटकीय अंदाज में भंग कर दिया था. पीडीपी ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया था, जिसके बाद नाटकीय घटनाक्रम में राज्यपाल सत्य पाल ने राज्य विधानसभा को भंग कर दिया.

जम्मू कश्मीर में सीधे लागू नहीं होता राष्ट्रपति शासन
देश के अन्य भागों के विपरीत जम्मू-कश्मीर में सीधे राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया जा सकता. राज्य संविधान की धारा 92 के तहत पहले छह माह के लिए राज्यपाल शासन ही लागू होगा. इस दौरान राज्यपाल चाहें तो विधानसभा को निलंबित रखें या भंग करें. इस अवधि के दौरान राज्य विधानमंडल के सभी अधिकार राज्यपाल के पास चले जाते हैं.

इन कारणों से राष्ट्रपति शासन को दिया जा सकता है विस्तार
राष्ट्रपति शासन लागू होने के छह महीने के भीतर ही राज्य में नए विधानसभा चुनाव कराना जरूरी है. अगर किन्हीं कारणों से चुनाव न हो सकें तो राष्ट्रपति शासन को अगले 6 महीने के लिए और विस्तार दिया जा सकता है. हालांकि किसी भी स्थिति में राष्ट्रपति उद्घोषणा तीन साल से ज्यादा देर तक प्रभावी नहीं रह सकती, लेकिन चुनाव आयोग अगर राज्य में चुनाव कराने में दिक्कतों का उल्लेख करते हुए उनकी पुष्टि करे तो यह शासन आगे भी लागू रखा जा सकता है.