जेट एयरवेज की बढ़ी परेशानी, प्रमोटर्स द्वारा फंड हेराफेरी करने की SFIO करेगी जांच

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कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने गंभीर जालसाजी जांच कार्यालय (SFIO) से जेट एयरवेज और उसकी सहायक कंपनियों की इस मामले में जांच शुरू करने को कहा है कि इसके प्रमोटर्स ने फंड निकालकर कहीं और तो नहीं लगाया है.

गौरतलब है कि करीब 8,400 करोड़ रुपये के कर्ज बोझ से दबे एयरलाइंस ने अप्रैल में अपना कामकाज बंद कर दिया था, क्योंकि उसके पास आगे संचालन के लिए पैसा ही नहीं था. एक बिजनेस चैनल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सरकार के पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि धन की हेराफेरी की गई है, इसलिए सरकार ने एसएफआईओ से जांच कराने का निर्णय लिया है.

खबर के अनुसार, SFIO के वेस्टर्न रीजनल डायरेक्टर ने इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट इसी हफ्ते दी है, जिसके बाद मंत्रालय ने जांच शुरू करने का आदेश दिया. करीब आठ महीने पहले ही मंत्रालय ने यह शुरुआती आकलन करने का आदेश दिया था कि फंड का किसी तरह का डायवर्जन हुआ है या नहीं.

जेट एयरवेज जब पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अपने वित्तीय नतीजे पेश करने में नाकाम रही तो इस जांच में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) को भी जांच में शामिल किया गया.

SFIO की जांच से एक दिन पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने एतिहाद एयरवेज के जेट में पब्लिक जॉइंट स्टॉक कंपनी निवेश के बारे में जांच शुरू की है. ईडी इस बात की जांच कर रही है, एतिहाद ने 2014 में जेट प्रीविलेज प्राइवेट लिमिटेड (JPPL)में जो निवेश किया था, उसमें कहीं एफडीआई नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है.

ईडी ने जेट के कई अधिकारियों को बुलाकर इस सौदे के ढांचे के बारे में जानकारी ली थी. इसके पहले विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड द्वारा उठाए गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिल पाया है.

इसके पहले बैंकों से इमरजेंसी फंड न मिल पाने की वजह से 17 अप्रैल को जेट को अपना कामकाज अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था. गौरतलब है कि जेट एयरवेज के ऊपर 8,500 करोड़ रुपये का कर्ज है. कंपनी को चलाए रखने के लिए 400 करोड़ रुपये के आपात फंड की जरूरत थी, लेकिन एसबीआई ने इसे देने से इंकार कर दिया.

जेट एयरवेज की उड़ान सेवाएं अस्‍थायी तौर रोक दी गई हैं. जेट एयरवेज संकट की वजह से करीब 23 हजार कर्मचारी प्रभावित हैं. इन कर्मचारियों को कई महीनों से सैलरी नहीं मिली है.

जेट एयरवेज की बोली लगाने के लिए मुख्य तौर पर 4 फर्म ने शुरुआती दौर में चार रुचि दिखाई थी-एतिहाद एयरवेज, राष्ट्रीय निवेश कोष, निजी क्षेत्र के टीपीजी कैपिटल और इंडिगो है. ब्रिटेन के युवा कारोबारी जेसन अंसवर्थ ने भी जेट एयरवेज को नियंत्रण में लेने की इच्छा जाहिर की थी.

खस्ताहाल जेट एयरवेज को खरीदने के लिए अभी तक उसके संभावित खरीदारों ने भी कोई खास रुचि नहीं दिखाई है. इससे इस बात की आशंका बढ़ गई है कि कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा.