राजपथ पर नहीं दिखेगी हिमाचल की झांकी, मंत्रालय को भेजा मॉडल हुआ रिजेक्ट

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गणतंत्र दिवस के मौके पर इस साल राजपथ पर हिमाचल की झांकी नजर नहीं आएगी. हिमाचल की ओर से भेजे गए मॉडल को रक्षा मंत्रालय ने रिजेक्ट कर दिया है. भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा महात्मा गांधी के शिमला यात्रा पर आधारित मॉडल को तैयार कर रक्षा मंत्रालय को भेजा गया था. मंत्रालय के साथ विभाग की चौथे और आखिरी चरण की बैठक में जिस मॉडल को रिजेक्ट कर दिया गया है. यदि यह मॉडल सिलेक्ट होता तो महात्मा गांधी पर गाया गया पहाड़ी गाना झांकी के साथ राजपथ पर गूंजता. बहरहाल अब दिल्ली में हिमाचल की झांकी नजर नहीं आएगी. अब भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग ने इस मॉडल पर बनी झांकी को शिमला में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है.

अब तक राजपथ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर हिमाचल की 17 झांकियां दिख पाई हैं. पिछले साल 2018 की यदि बात करें तो की-गोम्पा की झांकी को प्रदर्शित किया गया था. लाहुल स्पीति जिला में काजा से 12 किमी की दूरी पर जिस मठ की स्थापना 13वीं शताब्दी में की गई थी, जबकि इससे पूर्व साल 2017 में चंबा रूमाल की झांकी को पहाड़ी गाने पर चलाने की रक्षा मंत्रालय ने अनुमति प्रदान की थी. तब अपनी झांकी को राजपथ पर दिखाने का मौका हिमाचल को चार साल बाद मिला था. मगर दो साल बाद अब एक बार फिर हिमाचल को निराशा मिली है और दिल्ली में आयोजित होने वाले गंणतत्र दिवस समारोह में हिमाचल प्रदेश की अनुपस्थिति दर्ज होगी.

हिमाचल की तरफ से महात्मा गांधी की शिमला यात्रा से संबंधित झांकी का मॉडल तैयार किया गया था. जिसे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रो. हिमचटर्जी द्वारा तैयार किया गया था. आखिरी चरण में हमें निराशा मिली लेकिन इसकी अहमियत को देखते हुए इस बार शिमला में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में इस झांकी को ऐतिहासिक रिज मैदान पर प्रदर्शित किया जाएगा. विभाग ने अपनी ओर से पूरे प्रयास किए थे लेकिन बड़े राज्यों के साथ प्रतियोगिता में थोड़े पिछड़ गए.