शिमला : हिमाचल सरकार की ऋण लेने की सीमा 800 करोड़ रुपये घटी

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केंद्र ने हिमाचल सरकार की ऋण लेने की सीमा पर कैंची चला दी है। इस वित्त वर्ष में प्रदेश के लिए 4900 करोड़ रुपये की लोन लेने की लिमिट निर्धारित की गई है। बीते वर्ष यह सीमा 5700 करोड़ थी। इस तरह इस वर्ष ऋण लेने की सीमा 800 करोड़ रुपये कम हो गई है।

जयराम सरकार ने प्रदेश के खर्चे पूरा करने के लिए शुक्रवार को 500 करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किया है। इस वित्त वर्ष में यह दूसरी बार है जब सरकार ने लोन के लिए आवेदन किया है। इससे पहले प्रदेश

सरकार ने 600 करोड़ का ऋण लिया था। 52 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार अपने कर्मचारियों को वेतन, पेंशन देने और विकास कार्यों के लिए यह ऋण ले रही है। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) से ट्रेजरी बांड से ऋण लेगी। प्रदेश सरकार लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही है। इसकी वजह यह है कि सरकार के खर्चे कम नहीं हो पा रहे हैं। वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए ऋण लिया जा रहा है। इस ऋण के लिए आरबीआइ से अनुमति मांगी जा रही है और उसके बाद ही ऋण मिल सकेगा।

ऋण सीमा यूं होती है तय

राज्य ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीएसडीपी) के तीन फीसद तक कोई भी सरकार ऋण ले सकती है। आरबीआइ से तीन फीसद तक ऋण उठाने के लिए सरकार को स्वीकृति मिलती है। इससे  ज्यादा ऋण उठाया जाता है तो इसे राज्य की माली हालत और कमजोर मानीजाती है।