AAP की है मजबूरी, गठबंधन है जरूरी ! पर राहुल हैं कि मानते नहीं

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को कांग्रेस से विनती करते नजर आए कि अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस हाथ मिला लें तो बीजेपी को हराया जा सकता है. ये अलग बात है कि उनकी विनती दिल्ली के लिए नहीं बल्कि हरियाणा के लिए थी लेकिन इसके मायने गंभीर हैं.

  • राजनीति की समझ रखने वाले लोग भी जानते हैं कि अरविंद केजरीवाल को विनती करने के मोड में जल्दी नहीं देखा जाता.
  • बावजूद इसके वे कांग्रेस को अपने पाले में मिलाने में लगे हैं, तो इसके नफा-नुकसान की भी उन्हें समझ होगी ही.
  • लोगों को ताज्जुब इसलिए भी है क्योंकि अभी हाल में दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने दो टूक कह दिया कि आम आदमी पार्टी से कोई अलायंस नहीं होगा.
  • अब सवाल है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो कांग्रेस से गठजोड़ के लिए आम आदमी पार्टी ने अपने सारे घोड़े खोल दिए हैं?
  • अब बात हरियाणा की. आम आदमी पार्टी का हरियाणा में मजबूत आधार नहीं है और पार्टी यहां घुसने की कोशिश कर रही है.
  • इंडियन नेशनल लोकदल में फूट के बाद जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) का दिसंबर में गठन हुआ था. अभी हाल में जेजेपी ने जींद विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था.
  • इसी उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने जेजेपी उम्मीदवार का समर्थन किया था लेकिन बीजेपी उम्मीदवार कृष्ण लाल मिड्ढा 12248 वोटों से बाजी मार गए. जेजेपी के दिग्विजय सिंह चौटाला दूसरे नंबर पर रहे. यानी बीजेपी नंबर एक, जेजेपी नंबर दो और कांग्रेस नबंर तीन पार्टी रही.
  • इस लिहाज से भी आम आदमी पार्टी सोच रही है कि हरियाणा में अगर कांग्रेस और जेजेपी से गठबंधन हो जाए तो बीजेपी को आसानी से मात दी जा सकती है.

मगर अरविंद केजरीवाल की पार्टी के सामने अहम सवाल ये है कि उस बीजेपी को कैसे जवाब दें जिसने 2014 लोकसभा चुनाव में 7 सीटों पर कब्जा जमाया था जबकि आईएनएलडी को 2 और कांग्रेस को 1 सीट पर संतोष करना पड़ा था. आम आदमी पार्टी  इस सवाल का जवाब कांग्रेस के साथ गठबंधन में ढूंढ रही है.

वहीं केजरीवाल की गठबंधन की चाह पर ट्वीटर पर लोग काफी मजे भी ले रहे हैं.