बटाला पटाखा फैक्ट्री धमाका : पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया

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पंजाब के बटाला में बुधवार शाम पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके में 23 लोगों की मौत हुई थी। गुरुवार को इसमें 21 मृतकों की पहचान कर ली गई जबकि दो की पहचान अभी तक नहीं हो पाई.

  • मृतकों में शामिल चार लोग फैक्ट्री के मालिक हैं। 12 फैक्ट्री में काम करने वाले मुलाजिम और तीन राहगीर थे
  • गुरुवार सुबह करीब आठ बजे तक लुधियाना से आई एनडीआरएफ की 70 सदस्यीय टीम और चंडीगढ़ से आई 36 सदस्यीय टीम बचाव कार्य में लगी हुई थी
  • इसके अलावा शाह सतनाम जी ग्रीन वेलफेयर फोर्स सिरसा के सदस्य भी मौके पर पहुंचे मगर तब तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने अपना अभियान खत्म कर दिया था
  • दोपहर करीब 12 बजे चंडीगढ़ से फोरेंसिक टीम ब्लास्ट साइट पर पहुंची। टीम की जांच के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने मलबा दो ट्रकों में भर कर भेज दिया
  • दोपहर बाद बचाव कार्य बंद कर दिया गया। बटाला के डीएसपी लखविंदर सिंह कलेर ने बताया कि बुधवार करीब साढे़ तीन बजे से बचाव कार्य शुरू कर दिए गए थे और सारी रात पंजाब पुलिस के जवान, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव अभियान में लगी रही।

 15 गाड़ियां क्षतिग्रस्त
अचानक से तीन धमाके हुए। पता नहीं चला कि किस तरफ से ईंटें और पत्थर गिरने लगे। यह कहना है दिल्ली मोटर गैराज के मालिक राजिंदर सिंह राजू का। रामदास कालोनी निवासी राजू भी इस ब्लास्ट में घायल हुए हैं। उनके कान पर चोट आई हैं और 16 टांके लगे हैं। राजू का गैराज पटाखा फैक्ट्री के बिल्कुल साथ था. उन्होंने बताया कि बुधवार को वह अपने गैराज में काम कर रहे थे कि अचानक फैक्ट्री में धमाके की आवाज आई। वह भाग कर बाहर गए तो दो चार मिनटों में आस-पास की दीवारें गिरने लगी। करीब 3-4 ब्लास्ट हुए। चारों तरफ से ईंट-पत्थर गिरने लगे। ईंट लगने से उनके कान पर चोट लग गई। उन्होंने बताया कि यह पटाखा फैक्ट्री 1997 से चल रही है।

डेढ़ साल पहले इस फैक्ट्री के खिलाफ उनकी शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था। अब मालिक उन्हें आंखें दिखाते थे। प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जिसके कारण आज यह हादसा हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि इस धमाके की वजह से उनकी गैराज में रखी करीब 15 गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुई और उनका लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।