1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना पर भारत की शौर्य विजय का साक्षी बना कारगिल आज भी भारतीय सेना की उन वीर कहानियों को बयान करता है । सीमा पर उपजे विवादों के बीच कारगिल में आज भी सेना के आपरेशन विजय के वो किस्से सुनाए जाते हैं जिनके पराक्रम के बल पर भारतीय सेना के जवानों ने पाक के नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया था । तस्वीरों में देखें कारगिल युद्ध के 17 साल बाद अब कैसा दिखता है कारगिल कारगिल जम्मू और कश्मीर का एक जिला है । जिले का मुख्यालय कारगिल है । यह श्रीनगर से

आतंकवाद के खिलाफ पीओके में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकवादी दहशत में हैं। ऐसी सूचना है कि लगभग 300 आतंकी कैंप छोड़कर भाग गए हैं। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के सर्जिकल स्ट्राइक से पहले वहां 500 से अधिक आतंकी कैंपों में थे। मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब को जिस कैंप में ट्रेनिंग दी गई थी, उस कैंप से भी आतंकी भाग गए हैं। उनको अपने मारे जाने का डर सता रहा है। ये कैंप मुजफ्फराबाद के पास है। बताया जा रहा है कि 24 कैंपों से आतंकी अपने

उरी में हुए आतंकी हमले में जख्मी एक जवान की मौत हो गई, जिसके बाद इस हमले में शहीद जवानों की संख्या 19 हो गई। गुरुवार को अपराह्न सैनिक अस्पताल नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। मृतक जवान नायक राजकिशोर सिंह आरा के रहनेवाले थे। सूचना के बाद आरा के बड़हरा प्रखंड के पिपरपांती गांव में मातम पसर गया। उरी में शहीद राजकिशोर सिंह 6 बिहार बटालियन में तैनात थे। हमले में वे घायल हो गए थे। उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था। आज पटना एयरपोर्ट पर लाया जाएगा शव शहीद राजकिशोर सिंह का पार्थिक शरीर शुक्रवार को सैनिक सम्मान के साथ

अपने क्षेत्र में भारतीय सेना के सर्जिकल हमले से पाकिस्तान बौखला गया है। इस हमले की घोषणा के कई घंटे बाद पाक ने एक भारतीय जवान को पकड़ने और 8 सैनिकों को मारने का दावा किया। वहीं भारतीय सेना ने इस खबर को एकदम झूठ और बेबुनियाद करार दिया है। पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया समूह डॉन ने सैन्य सूत्रों के हवालों से कहा कि पाक सेना ने एलओसी के अग्रिम मोर्चे पर भारतीय सेना की गोलीबारी के दौरान एक भारतीय जवान को पकड़ लिया है। डॉन के अनुसार, यह वाकया तत्ता पानी इलाके में घटी। अखबार के मुताबिक, भारतीय जवान की पहचान

भारतीय सेना के सर्जिकल आपरेशन की तैयारियों से सहमे पाकिस्तान ने पीओके के 12 आतंकी कैंपों को बंद कर दिया है। इसके अलावा छह आतंकी प्रशिक्षण कैंपोँ को ठिकाने बदल दिए गए हैं। इन कैंपों को एलओसी से हटाकर पीओके के अंदरुनी जंगली इलाकों में ले जाया गया है। पीओके में 45 से 50 आतंकी प्रशिक्षण शिविर हैं जिनमें से 42 के बारे में भारतीय सेना के पास पुख्ता इनपुट हैं। एलओसी पर पाकिस्तान सेना की तैनाती भी बढ़ी है और एलओसी पर उड़ी के अलावा घाटी के कई इलाकों में पीओके के गांव खाली कराए गए हैं। हांलाकि भारतीय सेना किसी

आमतौर पर कश्मीर में हिंसा और सेना के विरोध की तमाम खबरें देखने को मिलती हैं । सेना और प्रदर्शनकारियों की झड़प की तमाम तस्वीरों के पीछे भारतीय सेना का एक ऐसा चेहरा भी है जो देश के बहुत से लोगों को पता न हो । कैसे भारत की सेना कर रही है कश्मीर के बच्चों के सपनों को पूरा आमतौर पर कश्मीर में हिंसा और सेना के विरोध की तमाम खबरें देखने को मिलती हैं । सेना और प्रदर्शनकारियों की झड़प की तमाम तस्वीरों के पीछे भारतीय सेना का एक ऐसा चेहरा भी है जो देश के बहुत से लोगों

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया है । इस हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान घायल हुए हैं । आतंकियों का हमला उस वक्त हुआ है जब ये जवान अपनी रूटीन हाइवे पेट्रोलिंग पर निकले हुए थे । प्राप्त जानकारी के अनुसार अनंतनाग के वनपोह में सीआरपीएफ के इन जवानों पर हमले के बाद सेना और सीआरपीएफ के उच्च अधिकारी यहां पहुंच गए हैं । घटना के बाद पूरे इलाके को घेर कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है । इस हमले में घायल हुए सभी सीआरपीएफ जवानों को अस्पताल

नियंत्रण रेखा के उस पार पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी सरगर्मियां बढ़ी हैं। लांचिंग पैड पर नए आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार हैं। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के करीब तीन सौ फिदायीन तैयार हैं। ये जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के प्रमुख स्थानों पर भी हमला करने की फिराक में है। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर ने कुछ दिन पहले पीओके के मुजफ्फराबाद में फिदायीनों की परेड भी कराई थी। मसूद अजहर के जम्मू-कश्मीर में कई पूर्व आतंकियों के साथ बेहतर संबंध हैं। कश्मीर में आतंकी हमलों के बाद जम्मू को भी टारगेट पर रखा गया है। कहा

अलगाववादियों की पुलिस भर्ती में न शामिल होने की अपील को दरकिनार करते हुए आज हजारो कश्मीर युवक श्रीनगर में चल रही स्पेशल पुलिस आफिसर पद के लिए हो रही पुलिस भर्ती में शामिल हो रहे हैं । पिछले दिनों अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी ने कश्मीरी युवकों से पुलिस भर्ती में शामिल न होने की अपील की थी । कश्मीरी युवकों ने इस अपील को दरकिनार करते हुए बड़ी संख्या में पुलिस भर्ती के लिए आवेदन किया है । पुलिस भर्ती की इस प्रक्रिया में युवकों को शारीरिक दक्षता और मेडिकल टेस्ट के लिये बुलाया गया है जिसके लिए सुबह

पुंछ-रावलाकोट बस से सोमवार को पीओके लौट रहे कुछ नागरिकों ने उस पार से बार-बार होने वाले आतंकी हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए दर्द-ए-दिल बयां किया। उन्होंने कहा कि हमें समझ नहीं आ रहा बेगुनाह लोगों का खून बहा कर यह लोग क्या साबित करना चाहते हैं और कौन सी आजादी लेना चाहते हैं। हिंदुस्तान में कौन गुलाम है? उन्होंने कहा कि गुलाम तो हम हैं जो पीओके में रहते हैं और पाकिस्तान की मर्जी के बिना सांस तक नहीं ले सकते हैं।