पटपड़गंज विधानसभा सीट पर कांटे की लड़ाई के बाद मनीष सिसोदिया बड़े अंतर से जीते

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पटपड़गंज विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया पीछे चल रहे हैं। यहां उनके मुख्य प्रतिद्वंदी हैं बीजेपी के रवि नेगी। जबकि कांग्रेस की ओर से लक्ष्मण रावत खड़े हैं। कांग्रेस और बीजेपी दोनों के उम्मीदवार मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। कोशिश ये है कि क्षेत्रीय अस्मिता के सहारे गेम बदलने की। लेकिन अभी तक इसका ज्यादा असर दिखता नजर नहीं आ रहा है। दोपहर तक तय हो जाएगा कि दोनों उत्तराखंडी मनीष सिसोदिया को हैट्रिक लगाने से रोकते हुए नजर आ रहे हैं।

मनीष सिसोदिया की बात करें तो साल 2013 में पटपड़गंज से अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में बीजेपी के नकुल भारद्वाज को हरा दिया। इसी तरह 2015 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के बिनोद कुमार बिन्नी को शिकस्त दी। सिसोदिया को 75477 वोट मिले तो बिन्नी को सिर्फ 46716 से संतोष करना पड़ा। इस बार भी बीजेपी ने यहां अपना प्रत्याशी बदल दिया लेकिन उसका फायदा नहीं मिला।

सिसोदिया ने पत्रकारिता के बाद पॉलिटिक्स का दरवाजा खटखटाया. उनका जन्म 5 जून 1972 को हापुड़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। सिसोदिया दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी और विश्वसनीय लोगों में से एक हैं। वो डिप्टी सीएम के रूप में सरकार के नंबर-2 हैसियत में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि केजरीवाल पार्टी का चेहरा हैं तो सिसोदिया सरकार के कामकाज पर पैनी नजर रखते हैं। लोग उन्हें दिल्ली के सरकारी स्कूलों की दशा-दिशा बदलने वाले नेता के रूप में देखते हैं।

यह विधानसभा सीट पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र के अंतगर्त आती है। जहां ब्राह्मण, एससी, उत्तराखंडी और गुर्जर वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इसीलिए बीजेपी और कांग्रेस ने उत्तराखंडी उम्मीदवार उतारे हैं। यहां 2015 में 65.48% तक वोट पड़ा था। इस बार मनीष सिसोदिया जीतते हैं तो वो इस सीट से कांग्रेस के तीन बार जीतने की बराबरी कर लेंगे।