दिल्ली मेट्रो के घाटे की भरपाई कर सकता है केंद्र

दिल्ली मेट्रो में हो रहे ऑपरेशनल नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने नियमों का हवाला देकर मदद करने में असमर्थता जाहिर की है। लेकिन सच यह है कि नियमों के मुताबिक दिल्ली मेट्रो के फेज-1 और 2 की लाइनों के मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार नुकसान का आधा-आधा बोझ उठाकर यात्रियों को बढ़े हुए किराए में कुछ हद तक राहत दे सकते हैं।

मेट्रो किराए में बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पेशकश की थी कि घाटे की भरपाई और बढ़े किराए की मार से यात्रियों को बचाने के लिए वे आधा खर्च यानी डेढ़ हजार करोड़ रुपये देने को तैयार हैं और आधी राशि केंद्र सरकार दे। हालांकि बाद में आवास एवं शहरी कार्यमंत्री हरदीप पुरी ने इसे नियमों के खिलाफ बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से मेट्रो के नुकसान का आधा भार उठाना नियमों के खिलाफ नहीं है। इसकी वजह यह है कि जब दिल्ली मेट्रो के पहले चरण को मंजूरी दी गई थी, उस वक्त तय शर्तों में यह कहा गया था कि अगर दिल्ली मेट्रो को नुकसान होता है तो केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही आधा-आधा बोझ उठाएंगे। इसके बाद जब दूसरे फेज को मंजूरी दी गई, उसमें भी सभी शर्तों का ज्यों का त्यों रखा गया। हालांकि तीसरे फेज की मंजूरी में इस शर्त को बदल दिया गया और कहा गया कि अगर मेट्रो को चलाने में नुकसान होता है तो उसकी भरपाई अकेले राज्य सरकार को करनी होगी। यही शर्त अन्य राज्यों के लिए भी लगाई गई है।

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि चूंकि अभी थर्ड फेज की सभी लाइनों पर तो ट्रेनों ने दौड़ना भी शुरू नहीं किया है और फिलहाल मेट्रो को जो नुकसान हुआ है, वह पहले और दूसरे फेज की मेट्रो लाइनों का ही है। ऐसे में केंद्र सरकार चाहे तो मेट्रो के ऑपरेशनल नुकसान की भरपाई करने में किसी तरह का नियम आड़े नहीं आता।

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