World Diabetes Day: हरियाणा में तेजी से फैल रही है डायबिटीज की बीमारी

बदलती जीवनशैली और खान-पान व काम का बढ़ता बोझ हरियाणा के लोगों को मधुमेह की ओर धकेल रहा है. हरियाणा का हर पांचवां व्‍यक्ति मधुमेह और मोटापे का शिकार है. खास कर सामाजिक-आर्थिक  रूप से अच्छी स्थिति वाले तबके के मुकाबले कमजोर वर्ग में मधुमेह के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस-4) की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के जिले मोटापे व मधुमेह रोगियों में सबसे आगे हैं. शीर्ष पांच जिलों में सोनीपत पहले पायदान पर है, जिसके बाद करनाल, पानीपत, कैथल व फरीदाबाद का नंबर आता है. प्रदेश की कुल 20.57 फीसद आबादी इस बीमारी से जूझ रही है. विशेषकर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों पर खतरा ज्यादा है.

प्रदेश में सेचुरेटिड फैट व हाई कैलोरी आहार के सेवन और शारीरिक श्रम की अनदेखी से यह समस्या बढ़ी. राज्य की राजधानी चंडीगढ़ में कमजोर वर्ग के लोगों के बीच मधुमेह की दर 26.9 फीसद पाई गई जबकि अच्छी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले 12.9 फीसद लोग मधुमेह से ग्रस्त हैं. हाल में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि मध्य वर्ग की शहरी महिलाओं में जहां 17.7 फीसद इस बीमारी की चपेट में हैं, वहीं गांवों में यह आंकड़ा 10 फीसद है.

शहरी महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ), कमर पर चर्बी, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ रहा है.  40 से 60 वर्ष की उम्र के बीच मधुमेह के मरीजों की तादाद 20 फीसद बढ़ गई है.

क्या है मधुमेह

अग्नाशय में इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने से खून में शुगर लेवल बढ़ जाता है. इस स्थिति को ही मधुमेह कहते हैं. इंसुलिन एक हार्मोन है जिसकी जरूरत भोजन को एनर्जी में बदलने में होती है. इंसुलिन के बिन हमारा शरीर शर्करा का मात्रा को कंट्रोल नहीं कर पाता और भोजन से ऊर्जा लेने में कठिनाई होने लगती है. लगातार शुगर लेवल बढ़ा रहने से आंखों, मस्तिष्क, हृदय, धमनियां और गुर्दे को नुकसान पहुंच सकता है. आरामदायक जीवन शैली, अनुवांशिक कारण, तनाव, मोटापा, ज्यादा वसायुक्त पदार्थ और दवाओं की अधिकता टाइप टू डायबिटीज के कारण हैं.

मधुमेह के लक्षण

अत्यधिक भूख- प्यास, कमजोरी, आलस्य, त्वचा पर खुजली, जख्म का जल्दी ठीक न होना, बार-बार मूत्र, अनियमित हृदयगति, अंगों का सुन्न होना और नजर में धुंधलापन इसके लक्षण हैं. टाइप वन डायबिटीज जन्म से ही होती है. सामान्य से वजन ज्यादा है या आपके माता-पिता को डायबिटीज है तो अपने खून में शुगर की जांच कराएं. खाली पेट शुगर लेवल 70 से 100 के बीच नार्मल है. शुगर लेवल 100 से 125 है तो डायबिटीज की बार्डर लाइन पर हैं और इससे अधिक है तो आपको डायबिटीज यानि मधुमेह है.

इलाज में देरी खतरनाक

अगर शुगर है तो नीम हकीमों या सोशल साइट्स के फार्मूले के चक्कर में न पड़कर सीधे डॉक्टर से संपर्क करें. इलाज में देरी  का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. डॉक्टर की देखरेख में थोड़ी सी सावधानी रखकर इस पर काबू पाया जा सकता है. सादा खान-पान और रोजाना चार किमी की सैर से डायबिटीज नियंत्रित रहेगी. अधिक व्यायाम और दौडऩे से बचना चाहिए क्योंकि डाइबिटीज के मरीजों में दिल की बीमारी की संभावनाएं 98 फीसद तक होती हैं.

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