DMRC संभाल सकती हैव रैपिड मेट्रो चलाने का जिम्मा, RMGL के अकाउंट का ऑडिट कराएगी हरियाणा सरकार

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रैपिड मेट्रो रेल परिचालन के मामले में हाईकोर्ट का फैसला दो दिन के लिए टल गया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो दिन की मोहलत दी है. मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी. यदि कोर्ट ने बाध्य किया तो सरकार शुरुआती कुछ दिनों तक दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के माध्यम से इससे चलाएगी. मगर, पिछली कंपनी द्वारा दर्शाई गई ब्याज राशि का 80 फीसदी हिस्सा देने के लिए सरकार तैयार नहीं है.

 

सरकार कंपनी के लेखाजोखा का फारेंसिक ऑडिट कराने के पक्ष में है. इसमें समय लग सकता है. दूसरी तरफ रैपिड मेट्रो रेल गुड़गांव लिमिटेड (आरएमजीएल)ने एजेंसी के तौर पर इसे अगले 30 दिनों तक चलाने का भी सरकार को प्रस्ताव दिया है. सिकंदरपुर से सेक्टर-55/56 तक लगभग 12 किलोमीटर की दूरी में रैपिड मेट्रो रेल चलाने को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है. भविष्य में इसका संचालन कौन करेगा? इसको लेकर दोनों पक्षों में खींचतान चल रही है.

 

 

ऑडिट के पक्ष में सरकार: सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया है कि यदि आरएमजीएल रैपिड मेट्रो को चलाने के लिए तैयार नहीं है तो सरकार को यह जिम्मेवारी लेनी होगी, मगर कंपनी लेखाजोखा में भरोसेमंद नहीं है. कंपनी के लेखाजोखा को लेकर दिल्ली में दो एफआईआर भी दर्ज हैं. दूसरी तरफ कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार को कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए गए लेखा-जोखा पर व दर्शाई गई ब्याज राशि पर भरोसा नहीं है तो इसका ऑडिट करवा लें. कोर्ट ने पूछा है कि सरकार किस एजेंसी से इसका ऑडिट करवाएगी और ऑडिट की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी. जवाब में सरकार ने इसका कैग जैसी एजेंसी से फारेंसिक ऑडिट कराने की बात की है. निर्णय के लिए दो दिन का समय मांगा है.