EPFO नहीं देना चाहता ज्यादा पेंशन, SC में पुनर्विचार याचिका दायर होगी

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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले निजी क्षेत्र के सभी कर्मचारियों की पेंशन में भारी बढ़ोतरी के आदेश दिए थे, लेकिन अब EPFO कर्मचारियों को ज्यादा पेंशन नहीं देना चाहता.

  • EPFO इस मामले में हार मानने को तैयार नहीं है.
  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहा है.
  • एक अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में EPFO की याचिका को खारिज करते हुए केरल हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है.
  • केरल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन देने का आदेश दिया गया था.
  • फिलहाल EPFO द्वारा 15,000 रुपये के बेसिक वेतन की सीमा के आधार पर पेंशन की गणना की जाती है.
  • गौरतलब है कि कर्मचारियों के बेसिक वेतन का 12 फीसदी हिस्सा पीएफ में जाता है और 12 फीसदी उसके नाम से नियोक्ता जमा करता है.
  • कंपनी की 12 फीसदी हिस्सेदारी में 8.33 फीसदा हिस्सा पेंशन फंड में जाता है और बाकी 3.66 PF में.
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निजी कर्मचारियों के पेंशन की गणना पूरे वेतन के आधार पर होगी, इससे कर्मचारियों की पेंशन कई गुना बढ़ जाने का अनुमान था.
  • EPF पेंशन  या EPS एक पेंशन स्कीम है़, जिसके तहत प्राइवेट सेक्टर के संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी के दौरान बेसिक सेलरी के 8.33 फीसदी (1250 रुपए मासिक से ज्यादा नहीं) के बराबर पैसा इस स्कीम में जमा होता है.
  • इसके एवज में, यह कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद निश्चित ​मासिक पेंशन प्रदान करती है.
  • केरल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन देने का आदेश दिया गया था. फिलहाल ईपीएफओ द्वारा 15,000 रुपये के बेसिक वेतन की सीमा के आधार पर पेंशन की गणना की जाती है.

अब ईपीएफओ फिर से केरल हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहा है. अखबार मिंट के मुताबिक ईपीएफओ के वरिष्ठ अध‍िकारियों का कहना है कि कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) में फिलहाल हो रहा मासिक योगदान सीमित है और यह ज्यादा पेंशन देने के लिए पर्याप्त नहीं है. ज्यादा पेंशन देने से ईपीएफओ पर ही आर्थ‍िक बोझ काफी बढ़ जाएगा.

भारत सरकार का कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ही सभी कर्मचारियों के  ईपीएफ और पेंशन खाते को मैनेज करता है. हर ऐसा संस्थान जहां पर 20 या इससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, उसे EPF में हिस्सा लेना होता है. ईपीएस इस योजना के साथ जुड़कर चलती है इसलिए ईपीएफ स्कीम का मेंबर बनने वाला हर शख्स पेंशन स्कीम का मेंबर अपने आप बन जाता है.

EPF या EPS में, ऐसे कर्मचारियों का अंशदान जमा होना अनिवार्य है, जिनका बेसिक वेतन + DA 15000 रुपये या इससे अधिक होता है. जो कर्मचारी इससे अधिक बेसिक सैलरी पाते हैं, उनके पास ईपीएफ और EPS को अपनाने या छोड़ने का विकल्प होता है. आपके पीएफ खाते में नियोक्ता जो पैसा डालता है उसका एक हिस्सा पेंशन स्कीम के लिए ही इस्तेमाल होता है, जबकि आपकी सैलरी से जो पैसा कटता है वो पूरा का पूरा ईपीएफ स्कीम में चला जाता है.