हिमाचल : बेटे की शादी की धाम देने इस दिन बिलासपुर आएंगे जे.पी. नड्डा

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की कमान संभालने के बाद फरवरी में गृह राज्‍य हिमाचल आएंगे.

  • घर में 27 से 29 फरवरी तक बेटे की शादी के लिए हिमाचल में ही रहेंगे.
  • बताया जा रहा है जेपी नड्डा के बड़े बेटे गिरीश की शादी 24 व 25 फरवरी को राजस्‍थान के पुष्‍कर में होगी
  • 29 तारीख को पैतृक गांव में धाम का आयोजन किया जाएगा, इसमें दस हजार से ज्‍यादा लोगों को आमंत्रित किया जाएगा.
  • 6 मार्च को दिल्‍ली में भी रिसेप्‍शन का आयोजन होगा, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राष्‍ट्रस्‍तरीय नेता शामिल हो सकते हैं.
  • जेपी नड्डा के समधी राजस्‍थान में बिजनेसमैन हैं.
  • जेपी नड्डा राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनने के बाद बेटे की शादी के दौरान ही पहली बार हिमाचल आएंगे.
  • नड्डा दो से तीन दिन हिमाचल में रुक सकते हैं.
  • इस दौरान शिमला या अन्‍य जिलों में जाने के कार्यक्रम पर चर्चा चल रही है.
  • फिलहाल तो दिल्ली के चुनाव में व्यस्तता है,  यहां से फ्री होने के बाद इस कार्यक्रम को फाइनल किया जाना है.
  • इसके बाद पार्टी की ओर से पूरा शेड्यूल जारी किया जाना है, कि वह किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं.
  • हिमाचल से इस पद पर पहली बार कोई बड़ा नेता पहुंचा है, इसलिए पार्टी की ओर से पदभार संभालने के बाद पहली बार हिमाचल आने पर उनका भव्य स्वागत किया जाना प्रस्तावित है.

दिल्‍ली में प्रदेश के नेताओं ने किया था दौरा करने का आग्रह

जेपी नड्डा भाजपा के अध्यक्ष पद तक पहुंचने वाले पहले हिमाचली नेता हैं, इससे पहले पहाड़ी या छोटे राज्य से किसी भी नेता को यह मौका नहीं मिला है। इसलिए इनके हिमाचल के पहले दौरे को लेकर भाजपा के नेता सहित पार्टी के कार्यकर्ता काफी उत्साहित है। दिल्ली में अध्यक्ष बनने के बाद हिमाचल के सभी नेताओं ने बतौर अध्यक्ष हिमाचल का दौरा करने का आग्रह भी किया था।

बिलासपुर सदर से चुनाव लड़ते रहे हैं नड्डा

नड्डा बिलासपुर जिले के सदर निर्वाचन हलके से चुनाव लड़ते आए हैं। हिमाचल में पहला चुनाव जीतने के बाद ही उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। इसके बाद दूसरा चुनाव जीतने के बाद नड्डा राज्य में स्वास्थ्य मंत्री रहे. वहीं 2007 में नड्डा चुनाव जीतने के बाद वन मंत्री बने. इसके बाद वे हिमाचल सरकार को छोड़कर दिल्ली जाने को तैयार हुए. उन्होंने सरकार की बजाय संगठन को चुनाव और देश भर में संगठन की कमान संभाल रहे हैं.