सरकारी स्कूलों में ई-व्याकरण के माध्यम से पढ़ाई जा रही ‘हिंदी’

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कैथल के एक विद्यालय में पढ़ाने वाले डॉ विजय चावला ने हिंदी को रुचिकर विषय बना इसे सार्थक किया. डॉ चावला शिक्षा विभाग में एक मील का पत्थर साबित हो रहे हैं. डॉ चावला ने हिंदी जैसी वैदिक भाषा में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ई-व्याकरण और खेल पिटारा जैसे माध्यम तैयार किये और उन बच्चों के लिए वरदान साबित हुए जो हिंदी विषय को कठिन व अरुचिकर मानते थे.

कैथल के क्योड़क गाँव के सरकारी स्कूल में डॉ विजय चावला हिंदी के प्राध्यापक हैं और शिक्षा विभाग में आधुनिक शिक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो रहे हैं. उन्होंने छोटे बच्चों के लिए शिक्षा के ऐसे-ऐसे तरीके इजाद कर दिए हैं जिससे बच्चों का मानसिक विकास तो हो ही रहा है. साथ ही उन्हें आधुनिक तरीके से हिंदी भाषा का ज्ञान भी प्राप्त हो रहा है.

  • सरकारी स्कूल में ई-व्याकरण के माध्यम से पढ़ाई जा रही ‘हिंदी’
  • अध्यापक डॉ चावला की उपलब्धियों का असर 13 राज्यों में बरकरार
  • 13 राज्यों में उनके द्वारा बनाई गई ई-व्याकरण से पढ़ाई हो रही है
  • विभिन्न स्कूलों में अध्यापकों द्वारा पढ़ाई जा रही है ई-व्याकरण

अध्यापक डॉ चावला की उपलब्धियों का आलम यह है कि आज 13 राज्यों में उनके द्वारा बनाई गई ई-व्याकरण विभिन्न स्कूलों में अध्यापकों द्वारा पढ़ाई जा रही है. साथ ही उन्होंने खेल पिटारा जिसमें सांप सीढ़ी, लूडो व अन्य कई तरह के तरीके ईजाद कर छोटे बच्चों के लिए शिक्षा के आधुनिकीकरण के रास्ते खोल दिए हैं.

अध्यापक डॉ चावला की बनाई ई-व्याकरण और खेले पिटारा आज के समय में हिंदी जैसी वैदिक भाषा को भी आधुनिक तरीके से बच्चों को खेल खेल में ज्ञान प्रदान करने में काफी मददगार साबित हो रही है और देश के 13 राज्यों के अध्यापकों द्वारा डॉ विजय चावला की ई-व्याकरण इतनी पसंद की गई कि उन्होंने इसके माध्यम से ही अब अपने-अपने स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देना शुरू कर दिया है.