2+2 वार्ता : भारत-अमेरिका के बीच अहम सैन्य समझौते COMCASA पर हस्ताक्षर

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भारत और अमेरिका के बीच गुरुवार को पहली 2+2 द्विपक्षीय बातचीत हुई. 2+2 डायलॉग के दौरान इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इस मुलाकात में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने समकक्ष अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, रक्षामंत्री जेम्स पैटिस से बातचीत की.

इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच कम्युनिकेशन कम्पैटिबिलिटी एंड सेक्योरिटी अग्रीमेंट ( कॉमकासा ) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस समझौते के जरिए भारत को अत्याधुनिक अमेरिकी रक्षा तकनीक हासिल करने में मदद मिलेगी और काफी संवेदनशील सैन्य उपकरण भी भारत आ सकेंगे. इसके अलावा अब दोनों देश रक्षामंत्री और विदेश मंत्री लेवल की नई हॉटलाइन से जुड़ेंगे.

2+2 वार्ता के बाद भारत-अमेरिका ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि NSG में जल्द से जल्द भारत की सदस्यता को लेकर आज बातचीत हुई जिसपर सभी ने सहमति बनाई. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका की अफगान नीति का समर्थन करता है.

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि हम ( भारत-अमेरिका ) साथ आतंक और अन्य सुरक्षा संबंधी मसलों पर साथ काम करेंगे. उन्होंने कहा कि आज की इस बैठक के बाद हम हर संभव तरीके से शांति, संपन्नता और विकास पर सहयोग के लिए आगे बढ़ रहे हैं. साथ ही हम आतंक समेत अन्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर भी साथ आगे आने के लिए तैयार हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि COMCASA पर हस्ताक्षर होने से भारत अत्याधुनिक अमेरिकी तकनीक हासिल कर पाएगा.

इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने निर्मला सीतारमन और सुषमा स्वराज का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि यह भारत-अमेरिका के संबंधों का नया युग है. हम रिश्तों को बेहतर बनाने पर जोर देते हैं. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ने आज बेहद महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हम पीएम मोदी से मुलाकात कर यह तय करने वाले हैं कि ट्रंप के नेतृत्व में किस तरह से हम अपने संबंधों को विकसित कर सकते हैं. हमने हमारे द्विपक्षीय संबंधों और हमारे भविष्य को लेकर काफी बेहतर चर्चा की है.

यह समझते हुए कि दोनों देश रणनैतिक सहभागी हैं और वैश्विक मामलों में बड़े और महत्वपूर्ण साझेदार हैं, साथ ही अपने-अपने क्षेत्रों में दोनों नेतृत्व करते हैं, दोनों ही पक्ष के मंत्रियों ने वैश्विक मसलों के अलावा द्विपक्षीय, त्रि-पक्षीय और चर्तु-पक्षीय मसलों पर सहभागिता के साथ काम करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई.