ISRO के सबसे बड़े मिशन चंद्रयान-2 की ये है खासियत

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इसरो का महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 लॉन्च होने के लिए तैयार है. 15 जुलाई तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन केंद्र से चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग होगी. अनुमान जताया जा रहा है कि 6 सितंबर को यह चांद की सतह पर लैंड करेगा. यह पहली बार है जब भारत चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाएगा.

  • इससे पहले भारत ने चंद्रयान-1 के दौरान चंद्रमा पर मून इंपैक्ट प्रोब (MIP) उतारा था
  • लेकिन इसे उतारने के लिए नियंत्रित ढंग से चंद्रमा पर क्रैश करवाया गया था.
  • इस बार विक्रम (लैंडर) और उसमें मौजूद प्रज्ञान (छह पहिये का रोवर) चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाएंगे.
  • चंद्रयान-2 दुनिया का पहला ऐसा यान होगा, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा.
  • चांद का यह हिस्सा वैज्ञानिकों के लिए अब तक अनजान बना हुआ है.
  • बाकी हिस्से की तुलना में ज्यादा छाया होने की वजह से इस क्षेत्र में बर्फ के रूप में पानी होने की संभावना ज्यादा है.
  • वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस हिस्से में भविष्य में बेस कैंप बनाए जा सकेंगे
  • ऐसे में चंद्रयान-2 का महत्व पूरी दुनिया के लिए बढ़ जाता है.
  • आपको बता दें कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं.
  • चंद्रमा पर हर दिन तापमान घटता-बढ़ता रहता है, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होता.
  • यही कारण है कि वहां पानी मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है.

चंद्रयान-2 का उद्देश्य
चंद्रयान-2 का उद्देश्य चंद्रमा की सतह में मौजूद तत्वों का अध्ययन कर यह पता लगाना है कि उसके चट्टान और मिट्टी किन तत्वों से बनी है. इसके अलावा वह वहां मौजूद खाइयों और चोटियों की संरचना का अध्ययन के साथ उसकी सतह का घनत्व और उसमें होने वाले परिवर्तन की भी जांच करेगा. चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर जल, हाइड्रॉक्सिल के निशान ढूढ़ने के अलावा चंद्रमा के सतह की थ्रीडी तस्वीरें भी लेगा.