महबूबा मुफ्ती पर लगा PSA, अलगाववादियों से मिलीभगत का आरोप

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत केस दर्ज किया गया है. प्रशासन ने इसके लिए ‘अलगाववादियों के साथ काम करने’ का हवाला दिया है. छह पेज के डोजियर में हिरासत की यही वजह बताई गई है. ‘इंडिया टुडे’ को सूत्रों ने यह जानकारी दी.

महबूबा के ये बयान बने आधार!

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने से पहले महबूबा मुफ्ती ने एक बयान दिया था जिसमें कहा था ‘हम केंद्र सरकार को बताना चाहते हैं कि अनुच्छेद 35ए के साथ छेड़छाड़ बारूद को हाथ लगाने जैसा होगा. 35ए को जो कोई भी हाथ लगाएगा, न सिर्फ उसका हाथ बल्कि पूरा शरीर जल कर राख हो जाएगा.’  महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 हटाने पर ‘लिंचिंग’ और ‘हाइवे बंद’ करने की चेतावनी दी थी. डोजियर में इन बातों का जिक्र किया गया है, जिसके आधार पर महबूबा मुफ्ती के खिलाफ पीएसए चस्पा किया गया है.

बता दें, महबूबा मुफ्ती पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ सरकार भी चला चुकी हैं लेकिन उनका नाम उन 50 नेताओं में शुमार है जिन्हें 370 हटाने के बाद हिरासत में रखा गया है. पिछले साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) समाप्त कर दिया था.

लोक सुरक्षा कानून के तहत जम्मू-कश्मीर में किसी व्यक्ति को बिना जांच 2 साल हिरासत में रखने का प्रावधान है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद छह प्रमुख नेताओं के खिलाफ पीएसए लगाया गया है जिनमें तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. अगस्त में अनुच्छेद 370 हटने के तुरंत बाद फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगा दिया गया जबकि उमर अब्दुला और महबूबा मुफ्ती के छह माह जेल में गुजारने के बाद पीएसए लगाया गया है. इन नेताओं पर यह कार्रवाई आपराधिक दंड प्रक्रिया (सीआरपीसी) की धारा 107 के तहत की गई है.

भारी पड़ी बयानबाजी

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता नईम अख्तर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर और वरिष्ठ पीडीपी नेता सरताज मदनी, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के चाचा पर भी पीएसए लगाया गया है. मदनी के खिलाफ पीएसए लगाने का आधार अनुच्छेद 370 और 35ए के खिलाफ बयानबाजी बताया गया है.

मदनी के बारे में जारी डोजियर में कहा गया है, ‘मदनी भारत सरकार के फैसले के खिलाफ कश्मीरी युवाओं को भड़काने में शामिल थे.’ डोजियर में आगे कहा गया है, ‘मदनी घाटी के मतदाताओं को उग्रवाद और चुनाव बहिष्कार के लिए उकसाने में सफल रहे.’ पीएसए के डोजियर में कहा गया है कि आसिया और निलोफर के कथित बलात्कार और हत्या मामले (2009) में मदनी का अहम रोल था.

डोजियर में लिखा गया है, ‘उन्होंने (मदनी) असामाजिक तत्वों को लामबंद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे लोगों को सड़क पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाने और सक्रिय रूप से समर्थित अलगाववादियों को शामिल करने और विशेष रूप से अफ़ज़ल गुरु की फांसी के बाद भारत के जम्मू-कश्मीर से अलगाव कराने में शामिल थे.’