सूरजकुंड मेले में मिनी भारत, अलग-अलग राज्यों के प्रवेश द्वार

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हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों में बसा सूरजकुंड अपने 34 साल के सफर में मिनी भारत बन चुका है. हर साल किसी न किसी प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में चुना जाता है. ये सभी राज्य मेला परिसर में बनाए गए विभिन्न द्वारों की वजह से आज भी अपनी उपस्थिति यहां दिखा रहे हैं. बता दें कि सूरजकुंड मेला ग्राउंड में आने के लिए महरौली रोड पर पांच मुख्य प्रवेश द्वार बने हैं. हर गेट पर कोई न कोई स्टेट का प्रतीक द्वार बना है.

 

वीआईपी तीन नंबर गेट से पर्यटक प्रवेश करेंगे तो केरल का कोट्टायलांबा द्वार आपका स्वागत करता प्रतीत होगा. इस राज्य को वर्ष 1991 में थीम स्टेट बनाया गया था. इसी प्रकार गेट नंबर पांच पर हिमाचल का चंडी देवी और माता ज्वाला देवी द्वार पर्यटकों का अभिनंदन करते प्रतीत होगा. इससे थोड़ा आगे हैदराबाद की चारमीनार गोल गुंबद की अनुकृति बनी हुई है.

 

उत्तराखंड के द्वार पर गढ़वाल की यादें

वर्ष 1995 में सूरजकुंड मेले के थीम स्टेट रहे पंजाब के रामबाग की कलाकृति भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. वर्ष 2003 में मेले का प्रमुख सहयोगी उत्तराखंड अपने स्टेट के द्वार से गढ़वाल की याद ताजा बनाए हुए हैं.

झारखंड, पं. बंगाला, मप्र, छत्तीसगढ़ के भी द्वार

अन्य द्वारों में शाक्य तंगयुंग मोंटेसरी, उज्बेकिस्तान, मारूति टेंपल झारखंड, विष्णुपुर द्वार पं. बंगाल, दंतेश्वरी देवी मंदिर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ द्वार, गोआ स्वागत द्वार पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र तो हैं ही साथ ही इन राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी उनकी भूमि की स्मृति कराते हैं. कुल मिलाकर सूरजकुंड आने पर लगता है कि हम एक ही परिसर में बनाए गए मिनी भारत में आ गए हैं. इसे देखकर भारत देश की एकता,  अखंडता और हमारी विविध संस्कृति का अहसास होता है.