मूडीज ने 13 साल बाद बढ़ाई भारत की रेटिंग, GST और नोटबंदी की तारीफ भी की

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मूडीज ने घटाई चीन की रेटिंग, 1989 के बाद पहली बार ऐसा हुआ

मूडीज की राय में कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार अभी भी डिजाइन के स्तर पर ही है, फिर भी वो ये मानती है कि अब तक जिन सुधारों पर अमल हुआ है है उससे सरकार को कारोबारी माहौल सुगम बनाने, उत्पादकता बढ़ाना, देसी-विदेशी निवेश बढ़ाने और विकास दर में मजबूती व स्थिरता के लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में मदद मदद मिलेगी. चूंकि यहां विकास की संभावनाएं काफी मजबूत है, ऐसे मे सुधारों से विभिन्न घटनाक्रम के झटकों से मजबूती से निबटने में मदद मिलेगी.

एजेंसी ने विभिन्न सुधार कार्यक्रमों में जीएसटी और नोटबंदी के साथ, मौद्रिक नीति की नयी रुपरेखा, बैंकों के फंसे कर्ज से निबटने की रणनीति, आधार और जरुरतमंदों को सीधे सरकारी योजनाओं का फायदा यानी डीबीटी का खास तौर पर जिक्र किया है. एजेंसी मानती है कि जीएसटी की वजह से राज्यो के बीच व्यापार की बाधाएं खत्म होंगी जिससे उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा. दूसरी ओर भूमि और श्रम के क्षएत्र में सुधार भले ही परवान नहीं चढ़ पाए हों, लेकिन इनका अफना ही महत्व है.

मूडीज मानती है कि ज्यादात्तर सुधारों का असर देखने में थोड़ा समय लगेगा. नोटबंदी औऱ जीएसटी सुधारों ने थोड़े समय के लिए विकास दर पर असर भी डाला है. कुछ इसी वजह से मूडीज का आंकलन है कि 31 मार्च 2018 को खत्म होन वाले वित्त वर्ष 2017-18 में विकास दर 6.7 फीसदी रह सकती है. लेकिन जैसे-जैसे नये सुधार कार्यक्रमों की शुरुआती दिक्कतें दूर होंगी, उसका असर विकास दर पर देखने को मिलेगा.

छोटे औऱ मझौले उद्योगों के लिए सरकारी मदद और निर्यातकों के लिए जीएसटी के तहत मिलने वाली सुविधाएं भी इसमें मदद करेगी. इन्ही सब की बदौलत 2018-19 में विकास दर 7.5 फीसदी रह सकती है. आगे इसमें और भी तेजी की उम्मीद है. एजेंसी की राय में भारत की विकास संभावनाएं ‘बीएए2’ रेटिंग वाले कई देशें से बेहतर है.