अब तीन तलाक होगा अपराध, राष्ट्रपति ने दी अध्यादेश को मंजूरी

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तीन तलाक पर मोदी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार देर रात इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. केंद्र सरकार के पास अब इस बिल को 6 महीने में पास कराना होगा. बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी. यह अध्यादेश अब 6 महीने तक लागू रहेगा. बता दें कि लोकसभा से पारित होने के बाद यह बिल राज्यसभा में अटक गया था.

बिल को लेकर मोदी सरकार का रुख

ट्रिपल तलाक बिल को लेकर मोदी सरकार शुरू से ही आक्रामक रही है. 23 अगस्‍त, 2017 को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय समयसीमा में कानून बनाने के आदेश पर केंद्र सरकार ने तेजी से कदम उठाए. छह महीने के अंदर इसे संसद में पेश कर दिया. लेकिन लोकसभा में पास होने के बाद भी राज्‍यसभा में यह बिल कांग्रेस के असहयोग की वजह तीन पास नहीं हो पाया. हालांकि मोदी सरकार ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के विरोध के बाद इस बिल में संशोधन किया था. इसके बाद भी विपक्षी दल राज्‍यसभा में बिल को पारित नहीं होने दिया. यही वजह है कि मोदी सरकार ने कल इस बिल को अध्‍यादेश के जरिए लागू कर दिया है.

430 मामले आए सामने
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अध्‍यादेश लागू होने के बाद बताया कि हमारे सामने 430 तीन तलाक के मामले आए हैं, जिनमें से 229 सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले और 201 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद के हैं. हमारे पास तीन तलाक के मामलों के पुख्ता सबूत भी हैं. सबसे अधिक 120 मामले उत्तर प्रदेश से हैं.

रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हमने इसे बार-बार पास करवाने की कोशिश की. करीब पांच बार कांग्रेस को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वोटबैंक के चक्कर में कांग्रेस ने इसे पास नहीं करने दिया. कांग्रेस इस पर वोटबैंक की राजनीति कर रही है. केंद्र सरकार ने सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और मायावती को इस मुद्दे पर सरकार का साथ देने की अपील भी की थी.

आपको बता दें कि नए बिल में तलाक-ए-बिद्दत यानी ट्रिपल तलाक को को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा.