शिमला टाउन हॉल विवाद पर हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

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शिमला. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला (Shimla) के माल रोड पर साल 1908 में निर्मित ऐतिहासिक धरोहर टाउन हॉल (Town Hall Shimla) पर मालिकाना हक और उपयोग को लेकर 9 माह से चले आ रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने विराम लगा दिया है.

शुक्रवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई सुनवाई में नगर निगम की दायर याचिका पर कोर्ट ने आदेश दिया कि टाउन हॉल पर मालिकाना हक नगर निगम शिमला (Municipal Corporation Shimla) का होगा, लेकिन पूरा भवन नगर निगम के पास नहीं रहेगा. मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यालय ही टाउन हॉल में होगा, नगर निगम के अन्य कर्मचारी और अधिकारियों के कार्यालय टाउन हॉल में शिफ्ट नहीं होंगे.

यह है फैसला
हाईकोर्ट (Himachal High Court) के मुख्य न्यायाधीश वी. रामा सुब्रमण्यन और जस्टिस अनूप चितकारा की खंडपीठ ने फैसला आदेश में कहा कि टाउन हॉल का उपयोग अन्य पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के मकसद से किया जाए. हिमाचल आने वाले पर्यटकों को प्रदेश की संस्कृति, पर्यटन और अन्य विशेषताओं की जानकारी टाउन हॉल में मिल सके.

ढाई साल पहले शिफ्ट हुआ था निगम

नगर निगम शिमला ने उच्च न्यायालय से अपना पुराना कार्यालय टाउन हॉल वापस देने की गुहार लगाई थी. ढाई साल पहले 24 जून 2016 को टाउन हॉल के जीर्णोद्धार के चलते नगर निगम से भवन खाली करवाया गया. 29 नवबंर 2018 को टाउन हॉल का मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद 9 माह से नगर निगम की स्थानीय सरकार वापस टाउन हॉल में शिफ्ट करने की मांग कर रही थी. लेकिन HPTDC ने टाउन हॉल को प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने और अन्य गतिविधियों के लिए उपयोग करने की मांग की थी. HPTDC की मांग के खिलाफ नगर निगम की स्थानीय सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.