इस्‍लामाबाद/लाहौर राजनीतिक पार्टी बनाकर सत्ता में आने की कोशिश में लगे आतंकी हाफिज सईद को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान चुनाव आयोग ने उसकी पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग को मान्यता देने से इन्कार कर दिया है। साथ ही आयोग ने उम्‍मीदवारों को चुनावी अभियान में पार्टी के नाम के उपयोग न करने की चेतावनी दी। पाकिस्‍तान चुनाव आयोग के अनुसार, ऐसी पार्टी के पास किसी तरह की कानूनी वैधता नहीं और आयोग ने एमएमएल नाम की पार्टी के लिए किसी प्रतीक का आवंटन नहीं किया। आयोग ने आगे बताया, ‘बल्‍ब के प्रतीक के साथ निर्दलीय उम्‍मीदवार शेख मोहम्‍मद याकूब एनए-120 उपचुनाव लड़ रहे

इस्लामाबाद  अपनी जमीन पर आतंकवाद को पनपने देने और आतंकी संगठनों के खिलाफ माकूल कार्रवाई न करने को लेकर दुनिया के विभिन्न देशों के निशाने पर आया पाकिस्तान अब सफाई देने में जुट गया है। पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री और अब पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने आतंकवाद के मुद्दे पर देश की पॉलिसी का बचाव किया है। पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कुछ नहीं किया है तो दुनिया के किसी देश ने कुछ नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि अब आतंकवाद के खिलाफ ऐक्शन लेने

पकिस्तान में चीनी नागरिकों के लिए सख्त बिजनेस और वर्क वीजा नियम बनाने का निर्णय लिया गया है. गौरतलब है पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की हत्या के बाद से दोनों देशों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया है. वीजा को लेकर सख्त नियम बनाने का यह निर्णय इस्‍लामाबाद में गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान की अध्‍यक्षता में उच्‍चस्‍तरीय बैठक के दौरान लिया गया. हाल ही में हुई शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान दोनों देशे के बीच आई तल्खि देखने को मिली थी. इस समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाब शरीफ को देखते हुए भी नजरअंदाज

अमेरिका के एक प्रमुख थिंक टैंक संस्था ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा संदेश जारी किया है. सीएसआईएस ने कहा है कि अमेरिका को पाकिस्तान को ये साफ कर देना चाहिए कि अगर वो तालिबान का समर्थन जारी रखता है तो उसे कोई आर्थिक मदद नहीं दी जाएगी. सीएसआईएस का मानना है कि पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के लिए अब भी पनाहगाह बना हुआ है. और वह सहयोगी देश होने की बजाय खतरा अधिक है. थिंक टैंक ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप प्रशासन को इस्लामाबाद को यह साफ करना चाहिए कि अगर वो तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को समर्थन