काबुल: अफगानिस्तान में दो अलग-अलग मस्जिदों में हुए आत्मघाती हमलों में 63 से अधिक लोगों की मौत हो गई. पहला हमला राजधानी काबुल की एक शिया मस्जिद में हुआ जहां एक आत्मघाती हमलावर ने शाम की नमाज के दौरान खुद को विस्फोट में उड़ा लिया. इस हमले में 30 लोगों की मौत हो गई और 45 अन्य घायल हो गए. मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. काबुल के पुलिस प्रवक्ता अब्दुल बसीर मुजाहिद ने बताया, ‘‘दुर्भाग्य से आत्मघाती हमलावर ने दश्त-ए- बार्ची मस्जिद में नमाजियों के बीच खुद को विस्फोट में उड़ा दिया.’’ पुलिस ने शुरू में कहा

काबुल अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक सड़क पर अचानक कैम एयर के एक विमान के आने से शहर के लोगों में खलबली मच गई। हालांकि खामा प्रेस ने बताया कि इस विमान को एक पार्क में शिफ्ट किया जा रहा था ताकि इसे एक रेस्तरां के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। तमाम संदेह और शंकाओं के बीच विमान की तस्वीरें और विडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर किए गए। कहा गया कि विमान की इमरजेंसी लैंडिंग हुई है। हालांकि ऐसा कुछ नहीं है। Airplane on Kabul road sends residents into panic mode Read @ANI story | https://t.co/Y5UK8kaIOH pic.twitter.com/r8hRa9v6tt — ANI Digital (@ani_digital)

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पश्चिमी क्षेत्र में सोमवार सुबह करीब सात बजे एक कार बम हमले में कम से कम 35 लोग मारे गये और 40 अन्य घायल हो गये. हमले की जिम्मेदारी तालिबान ने ली है. पश्चिमी काबुल में आज सरकारी कर्मचारियों को लेकर जा रही बस को एक कार बम से निशाना बनाया गया. इस हमले की जानकारी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नजीब दानिश ने दी. दानिश ने कहा, सुबह भीड़-भाड़ के वक्त खनन मंत्रालय के कर्मचारियों को लेकर जा रही बस को कार बम से निशाना बनाया गया. हमले की जिम्मेदारी तालिबान ने ली है. गौरतलब है

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (एनडीएस) ने पाकिस्तान दूतावास के दो कर्मचारियों को हिरासत में लिया,  हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया. पाक मीडिया के अनुसार, पहले से ही बिगड़े पाकिस्‍तान-अफगानिस्‍तान संबध ने बुधवार को और बदतर रूप ले लिया जब अफगानिस्‍तान की जासूसी एजेंसी ने पाकिस्‍तान दूतावास के दो स्‍टाफ को हिरासत में ले घंटों तक प्रताड़ित किया। हालांकि तीन घंटे के बाद उन्‍हें रिहा कर दिया गया. कुलभूषण जाधव मामले में 1961 में हुए कूटनीतिक संबंधों के समझौते का उल्‍लंघन का आरोप