चंडीगढ़ किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे किसान संगठनों को बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन बैठक निर्धारित समय से शुरू नहीं हुई। इससे बैठक में शामिल होने आए भारतीय किसान संगठन एकता और किसान संगठन कादीया के प्रतिनिधियों ने सीएम आवास के बाहर धरना दे दिया। बाद में, लगभग तीन घंटे के बाद सीएम आफिस के अधिकारियों ने उन्हें मुख्यमंत्री के साथ बैठक के लिए बुलाया। किसानों का कहना है कि खेती पहले ही उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है ऊपर से सरकार अब पराली को आग

पंजाब में आलू की नई फसल अगले 2 हफ्तों तक बाजार में आने वाली है लेकिन इस बीच राज्य के कोल्ड स्टोरों में पड़े पिछले साल के करीब 75 लाख बोरी आलू के सड़क पर आने के आसार बढ़ गए हैं। इसका कारण है कि पंजाब की मंडियों में आलू को कोई मिट्टी के भाव भी खरीदने को तैयार नहीं है। जालंधर की मंडी में आलू के लिए 70 पैसे प्रति किलो से लेकर एक रुपए किलो तक की बोली लग रही है लेकिन इस भाव पर भी किसानों और कारोबारियों को खरीदार नहीं मिल रहा। पंजाब में पिछले साल करीब

सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही मंडियों में धान की फसल की आवक आना शुरू हो गई है. तरनतारन की अनाज मंडी में किसान बड़ी तादाद में धान की फसल को बेचने आ रहे हैं. बीते साल के मुकाबले इस साल किसानों की फसल दोगुने दाम पर बिक रही है, जिससे किसान काफी खुश दिखाई दे रहे हैं.  

पटियाला के बाहर महमूदपुर में किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है. अपनी मांगों को लेकर किसान धरने पर बैठे हुए हैं. सोमवार को भी भारी तादाद में किसान प्रदर्शन में शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वो बड़ी कुर्बानी से भी पीछे नहीं हटेंगे. इस दौरान किसानों ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर सवाल उठाए. किसानों ने कहा कि चुनाव से पहले कांग्रेस ने जो वायदे किए थे,उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है. दरअसल, पंजाब के किसान हर

धान की कटाई के बाद किसान अक्सर धान के अवशेष को खुले में लगा देते है जिससे पर्यावरण के साथ-साथ आमजन के स्वास्थ्य को भी बडी हानि पहुंचती है. लेकिन इस बार ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट इस मामले में सख्त हो गया है और सरकार को इससे निपटने के सख्त आदेश दिए है. सरकार की ओर से प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र जारी कर सख्ती से निपटने की तैयारी कर ली है. सरकार के नियमानुसार अब किसी किसान ने धान के अवशेष को आग लगाई तो उस पर कृषि विभाग द्वारा भारी भरकम जुर्माना लगाया जाएगा, जिसको लेकर सर्कलुर जारी

पटियाला में कल होने वाले किसानों के प्रदर्शन के चलते धारा 144 लागू कर दी गई है. दरअसल, किसानों ने सीएम कैप्टन अमिरंदर के न्यू मोती बाग पैलेस के घेराव की चेतावनी दी है, जिसे ध्यान में रखते हुए पटियाला प्रशासन ने शहर में धारा 144 लगा दी गई है. पटियाला के एसपी सीटी केसर सिंह ने इस बारे में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि सुरक्षा में 1500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, साथ ही पूरे शहर को भी सील कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि पुलिस किसी को भी कानून तोड़ने नहीं देगी.

पंजाब में किसानों की खुदकुशी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। प्रदेश में हर दिन किसान कर्ज से परेशान होकर खुदकुशी कर रहे हैं। इसी बीच संगरूर में कर्ज से परेशान एक और किसान बलकार सिंह ने खुदकुशी कर ली है। बताया जा रहा है कि 31 साल के बलकार सिंह पर 7 लाख का कर्ज था और इसी के चलते वह काफी परेशान था, जिससे बाद बलकार सिंह ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।

पंजाब में किसानों की खुदकुशी का सिलसिला बदस्तूर जारी है. एक के बाद एक किसान कर्ज से परेशान होकर अपनी जान दे रहे हैं.ताजा मामला राजपुरा का है जहां 32 साल के किसान हरदीप सिंह ने कर्ज से परेशान होकर खुदकुशी कर ली. मृतक पर करीब 17 लाख रुपए का कर्ज था. परिजनों के मुताबिक बैंक लगातार हरदीप पर दबाव बना रहा था, जिससे परेशान हो कर हरदीप ने जहरीला पदार्थ खा लिया और जान दे दी.

अमृतसर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि दस साल तक पंजाब में शासन करने वाले चार महीने में बोलने लगे हैं। सुखबीर सिंह बादल का नाम लिए बगैर कैप्टन ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा शेष नहीं है, इसलिए वह वर्तमान सरकार को फेल बता रहा है। अभी सरकार को बने महज चार माह ही हुए हैं। जो कमिटमेंट हमने की थी, वह शत प्रतिशत पूरी की जाएगी। कैप्टन यहां वीरवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कैप्टन ने कहा कि यह विरोधियों की साजिश है। किसानों