तमाम विवादों और किंतु-परंतु के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। रिकॉर्ड छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र के लिए जहां एक ओर सत्ता बचाए रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर 7वीं बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर भी। राज्य में पिछले कुछ दशकों से हर बार सत्ता विरोधी लहर के कारण सत्ता में परिवर्तन का ट्रेंड रहा है। ऐसे में सत्ता बचाने के लिए वीरभद्र को सत्ता विरोधी रुझान से पार पाना होगा। वह भी तब जब वह खुद और उनके परिवार के सदस्य भ्रष्टाचार के आरोपों से

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी मजबूत प्रत्याशी उतारेगी। जनता के बीच रह कर सेवा करने वाले जिताऊ प्रत्याशियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। सीएम ने हालांकि किसी का  नाम नहीं लिया। लेकिन नाहन के विधायक डॉ. राजीव बिंदल की ओर इशारा करते हुए सीएम ने जनता से गुजारिश की कि सिरमोर की पांचों सीटों के विधायक यहां के स्थानीय होने चाहिए। सिरमौर दौरे के दौरान सीएम ने नाहन और पांवटा में जनसभा को संबोधित किया। पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान एम्स को लेकर गए पूछे सवाल पर सीएम ने सिर्फ इतना कहा कि मोदी