सिरसा में स्वाइन फ्लू का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा हैं. ऐसे में लगातार मौतों का सिलसिला जारी हैं, जहां एक और मरीज की मौत स्वाइन फ्लू के चलते हो गई हैं. वही अब तक 2 रोगी की मौत हो चुकी है. सिरसा ज़िले में अब स्वाइन फ्लू से मरने वालो की संख्या दो हो गई है. इस बार सिरसा ज़िले में 8 स्वाइन फ्लू संभावित मरीजों की जांच की गई थी, जिसमे 4 पॉजिटिव मरीज पाए गए थे जिनमे से दो की मौत हो गई थी,जबकि 2 का उपचार हो गया है. स्वास्थ्य विभाग ने सभी डॉक्टर्स को निर्देश

दिल्ली में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या 12 पहुंच गई है. स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल एक अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 2,798 रही. डॉक्टरों का कहना है कि ये आंकड़ा बढ़ सकता है. उन्होंने सुझाव दिया है कि ठंडे होते मौसम के बीच लोग स्वास्थ्य को लेकर अधिक सावधानी बरतें. तापमान गिरने से स्वाइन फ्लू का वायरस ज्यादा तेजी से फैलता है, ऐसे में लोगों को बुखार आने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, स्वाइन फ्लू से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और गुजरात है.

स्वाइन फ्लू के प्रकोप के कारण मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। आज भारतीय जनता पार्टी की भीलवाड़ा के माण्डलगढ़ से विधायक की स्वाइन फ्लू के कारण मौत हो गई। जानकारी के अनुसार विधायक कीर्ति कुमारी पिछले कुछ दिनों से जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती थी। लेकिन आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार कीर्ति कुमारी का सबंध राजपरिवार से था। स्वाइन फ्लू से हुई विधायक की मौत के बाद राज्य सरकार की स्वाइन फ्लू को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर सवाल भी उठ रहें है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह में स्वाइन फ्लू के

शिमला आईजीएमसी में स्वाइन फ्लू से रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी की मौत के बाद डेंटल कॉलेज का एक कर्मचारी भी इस बीमारी की चपेट में आ गया है. यह कर्मी प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग में कार्यरत है. यह वह विभाग है जिसके हेड कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आरपी लुथरा हैं. कॉलेज के ही एक कर्मी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने से कॉलेज में हड़कंप मच गया है. इस विभाग में कुल 40 लोगों का स्टाफ है. इसमें पीजी डॉक्टर तक शामिल है. हवा के संपर्क से यह रोग अन्य में भी फैलने की आशंका बनी है. बुधवार को अपने ही विभाग के कर्मी

स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस A से होने वाला इनफेक्शन है. इस वायरस ने अब  हमला करने का वक्त बदल गया है, अब ये सर्दियों के बजाय गर्मियों में भी हमला बोलने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस का स्ट्रेन बदलने पर भी यह नया बदलाव हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो यह खतरे की घंटी भी हो सकती है, क्योंकि मौजूदा दवाएं इसकी रोकथाम में पूरा असर नहीं करेंगी. हिमाचल ही नहीं बल्कि राज्य से बाहर की बड़ी प्रयोगशालाओं में भी स्ट्रेन बदलने के संदेह पर जांच चल रही