नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाई कोर्ट 12 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए तलवार दंपति को बरी कर दिया है। निचली अदालत से मिली सजा रद्द की गई है। न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की खंडपीठ दोपहर दो बजे के बाद इस केस में फैसला सुनाया है। इस मामले में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआइ कोर्ट गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। अब गुरुवार को

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन तलाक और फतवे पर अहम टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा है कि पर्सनल लॉ के नाम पर मुस्लिम महिलाओं समेत सभी नागरिकों को प्राप्त अनुच्छेद 14, 15, 21 के मूल अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और जिस समाज में महिलाओं की इज्जत नहीं होती उसे सिविलाइज्ड नहीं कहा जा सकता. न्यायालय ने कहा है कि लिंग के आधार पर मूल व मानवाधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता. मुस्लिम पति ऐसे तरीके से तलाक नहीं दे सकता जिससे समानता व जीवन के मूल अधिकार का हनन होता हो. संविधान के दायरे में