समाज वाकई बदल रहा है। इसके साथ बदल रही है लोगों की सोच और बेटियों के प्रति नजरिया। वह भी ऐसे समाज के लोगों का, जहां बेटों की चाह में बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता है। यह स्याह सच कहीं-कहीं झूठ भी साबित हो रहा है। इस सच्चाई के दूसरे पहलू को समझना है तो किरढान चले आइए। यहां एक दंपती ने बेटी की चाह में दूसरे बच्चे को जन्म देने का फैसला लिया। पर, इस बार भी बेटा ही पैदा हुआ। मगर इस दंपती ने मिसाल कायम करते हुए अपने नवजात बेटे के बदले बेटी गोद

जिला हमीरपुर में प्रधानमंत्री बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत अभिदाता पंजीकरण फार्म सामने आया है, जिसमें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 8 से 32 वर्ष तक की बेटी का पंजीकरण किया जा रहा है. इस फार्म में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 200 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है तथा यह योजना देश के 28 राज्यों में शुरू हुई है, जिसमें 8 से 32 साल तक की बेटियों का एक फार्म भरा जाएगा व इसे पंचायत प्रधान द्वारा सत्यापित करवाने के बाद भारत सरकार महिला एवं विकास मंत्रालय शास्त्री

हिमाचल प्रदेश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के सार्थक परिणाम सामने रहे हैं. प्रदेश के कई जिलों में बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या में इजाफा हो रहा है. हमीरपुर जिले में बेटियां की संख्या में काफी इजाफा होने से लिंगानुपात में सुधार हुआ है. हमीरपुर के डीसी मदन चौहान ने यह जानकारी दी है. हमीरपुऱ में छह वर्ष तक के आयु वर्ग में एक हजार बेटों के मुकाबले 887 बेटियां थी, जो कि इस वर्ष मई 2017 तक 967 तक पहुंच गई हैं. डीसी मदन चौहान ने लिंगानुपात बढ़ने पर खुशी जताई है. डीसी मदन चौहान ने कहा कि लिंगानुपात में