लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के अंतिम दिन व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इसके साथ ही छठ महापर्व संपन्न हो गया। व्रती सूर्योदय से पहले ही घाटों पर पहुंच गए थे। हरिद्वार, ऋषिकेश सहित पूरे उत्तराखंड में गंगा व अन्य नदियों के घाटों में सुबह स्नान कर व्रतियों ने भास्कर देव को ऋतु फल, कंद मूल और नाना प्रकार के पकवानों से अर्घ्य देकर परिवार और राष्ट्र की सुखशांति की कामना की। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (नहाय-खाय) से शुरू हुआ छठ महोत्सव सप्तमी शुक्रवार को उगते भास्कर देव को अर्घ्य देने के साथ ही