नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों से 700 पीएफ ट्रस्टों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। इन ट्रस्टों ने ऑनलाइन रिटर्न दाखिल नहीं किये हैं। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) द्वारा की गई समीक्षा में 700 से अधिक निजी पीएफ ट्रस्टों द्वारा ऑनलाइन रिटर्न दाखिल नहीं करने की यह बात सामने आई थी। ईपीएफओ ने बताया कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आयुक्त ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इन ट्रस्टों द्वारा ऑनलाइन रिटर्न भरा जाना सुनिश्चित करने को कहा है। कार्यालयों को ऐसा न करने वालों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई का भी निर्देश दिया

EPFO ने पीएफ बकाये के संग्रह तथा भविष्य निधि निकासी का भुगतान, पेंशन और बीमा के लिये पांच बैंकों के साथ समझौता किया है. बैंक आफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक तथा कोटक महिंद्रा बैंक से ईपीएफओ को सालाना करीब 125 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे निवेश में तेजी के साथ अंशधारकों को भुगतान लाभ मिलेगा. अब जिन नियोक्ताओं का इन बैंकों में खाते होंगे, वे बकाया पीएफ (भविश्य निधि) इंटरनेट बैंकिंग के जरिये सीधे तत्काल ईपीएफओ के खाते में जमा कर सकते हैं. इस प्रकार की व्यवस्था नहीं होने से ईपीएफओ को बकाये का संग्रह

दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य योगदान घटाकर 10 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. अभी कर्मचारी और नियोक्ता मूल वेतन का 12 प्रतिशत ईपीएफ में योगदान करते हैं. ईपीएफओ की बैठक के एजेंडे में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य योगदान घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव था. श्रम सचिव एम सत्यवती ने कहा कि नियोक्ता, कर्मचारियों और सरकार के प्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जतायी और उनका मानना था कि इसे 12 प्रतिशत बने रहना चाहिए. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय भी इस बैठक में शामिल हुए