नई दिल्ली बांग्लादेश ने साफ कहा है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या म्यांमार की है और समाधान भी वहीं पर ढूंढा जाना चाहिए। बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद शहीदुल हक ने रोहिंग्याओं के मसले पर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। विदेश सचिव ने कहा कि हम म्यांमार सरकार की मदद कर सकते हैं लेकिन बांग्लादेश में रोहिंग्या मुसलमानों का रुकना समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम चाहते हैं कि रोहिंग्या जल्दी से जल्दी अपने देश वापस लौट जाएं। बता दें कि विदेश सचिव शहीदुल हक इस समय नई दिल्ली में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि म्यांमार

भारतीय सेना ने म्यांमार बॉर्डर पर कई आतंकी शिविरों को ध्वस्त किया है। सेना की पूर्वी कमान ने जारी बयान में कहा है कि भारत-म्यांमार बॉर्डर पर आज सुबह तकरीबन पौने पांच पजे सेना की पूर्वी कमान के जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे तभी अज्ञात घुसपैठियों ने फायरिंग की। भारत की सेना ने इस हिमाकत का करारा जवाब दिया और दुश्मन के कई आतंकियों को ढेर कर दिया, जबकि कई आतंकवादी घने जंगलों में भाग गये। इस कार्रवाई में सेना को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। ना ही सेना ने भारत-म्यांमार अतंर्राष्ट्रीय सीमा को पार किया है। सेना के

म्यांमार की सेना ने रविवार को कहा कि हिंसा प्रभावित रखायन प्रांत में 28 हिंदुओं की सामूहिक कब्र मिली है जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। आर्मी ने इसके लिए उसने मुस्लिम रोहिंग्या आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया है। म्यांमार सेना के अनुसार हजारों हिंदू उन गांवों से भाग चुके हैं जहां वो रह रहे थे क्योंकि रोहिंग्या आतंकवादियों द्वारा इन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि स्वतंत्र रूप से अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है। सेना प्रमुख की वेबसाइट पर पोस्ट किये हुए बयान में कहा गया है, ‘रखायन राज्य में सुरक्षा कर्मियों को 28 हिंदुओं के शव मिले

यांगून नागा विद्रोही समूह नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-खापलांग (एनएससीएन-के) के अध्यक्ष एस एस खापलांग की शुक्रवार की रात म्यांमार के कचिन राज्य के टक्का में मौत हो गई. मणिपुर में सेना के 18 जवानों को मारने सहित सुरक्षा बलों पर अन्य कई हमलों का मास्टरमाइंड रहा खापलांग की उम्र 77 साल थी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एनएससीएन-के के नेता की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई. शांगवांग खापलांग म्यांमार का हेमी नागा था और उसने अपना ज्यादातर वक्त म्यांमार में ही गुजारा. एनएससीएन का यह गुट 1980 के दशक से सुरक्षा बलों पर हमले, जबरन वसूली और लूटपाट जैसी