तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगा दी। साथ ही ये भी कहा कि इसे रोकने के लिए सरकार कानून बनाए। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा, "तलाक-ए-बिद्दत संविधान के आर्टिकल 14, 15, 21 और 25 का वॉयलेशन नहीं करता।" कोर्ट को ये तय करना था कि तीन तलाक महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है या नहीं, यह कानूनी रूप से जायज है या नहीं और तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा है या नहीं? इस

यूपी के संभल की पंचायत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. तुर्क बिरादरी की पंचायत ने तीन तलाक बोलने वाले युवक पर दो लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए शादी में तय मेहर की रकम वसूलने के आदेश दिए है. इसके साथ ही पंचायत ने लड़की पक्ष को दहेज का सारा सामान भी वापस दिलवाया. वहीं तुर्क बिरादरी ने दो महीने पहले स्थानीय स्तर पर पंचायत करके तय किया था कि बिरादरी में कोई भी एक साथ तीन तलाक नहीं देगा. ऐसे तलाक देने वालों को सजा की चेतावनी भी दी गई थी. बता दें, कि बीते रविवार को तुर्क पंचायत

दिल्ली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक नया हलफनामा दायर किया है. बोर्ड ने कहा है कि वह अपनी वेबसाइट, विभिन्न प्रकाशनों और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के जरिए लोगों को अडवाइजरी जारी करेगा और तीन तलाक के खिलाफ जागरूक करेगा. बोर्ड ने सोमवार को कोर्ट में 13 पेज का हलफनामा दायर किया. बोर्ड ने बताया कि तीन तलाक की प्रथा को रोकने की कोशिश की जाएगी. बोर्ड के विचारों के प्रसार के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक का इस्तेमाल किया जाएगा. बोर्ड के मुताबिक, निकाह करवाने वाला शख्स सुझाव देगा कि किसी तरह के मतभेद की स्थिति में एक

दिल्ली तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में 11 मई से जारी सुनवाई गुरुवार को खत्म हो गई. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुना. इससे पहले बुधवार को संवैधानिक पीठ ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से पूछा कि क्या औरतें तीन तलाक को ना कह सकती हैं. पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील सिब्बल से चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने पूछा कि क्या महिलाओं को निकाहनामा के समय तीन तलाक को ना कहने का विकल्प दिया

दिल्ली तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) से पूछा कि क्या महिलाओं को निकाहनामा के समय तीन तलाक को ना कहने का विकल्प दिया जा सकता है. प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह भी कहा कि क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है. पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खेहर ने सुनवाई के दौरान एआईएमपीएलबी के

दिल्ली तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार को भी जारी रही. इस दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का पक्ष रखते हुए कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि तीन तलाक की प्रथा 1400 सालों से चली आ रही है, ऐसे में यह असंवैधानिक कैसे हो सकती है. अगर अयोध्या में राम का जन्म आस्था का विषय है तो तीन तलाक क्यों नहीं? इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक प्रथा को पूरी तरह खत्म कर देती है तो सरकार इसके लिए कानून बनाएगी. इसके साथ ही कहा कि

दिल्ली तीन तलाक के मामले में केंद्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक प्रथा को पूरी तरह खत्म कर देती है तो सरकार इसके लिए कानून बनाएगी. इसके साथ ही कहा कि तीन तलाक प्रथा देश व इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के समानता के अधिकार के खिलाफ है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आगे बहुविवाह और निकाह हलाला की भी समीक्षा होगी. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक मामले में पांच जजों की संवैधानिक पीठ के सामने अपना पक्ष रखा. रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम समाज में प्रचलित ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला की परंपरा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर ऐतिहासिक सुनवाई दूसरे दिन भी जारी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं में तीन तलाक को वैध बताया गया हो, लेकिन यह निकाह खत्म करने का सबसे बुरा और अवांछनीय तरीका है. वहीं, मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने कहा कि ट्रिपल तलाक में कोई आपसी सहमति नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 15 में स्टेट लॉ की बात करते है, लेकिन हम यहां पर्सनल लॉ पर चर्चा कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने कोर्ट

इलाहाबाद उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने तीन तलाक और फतवे पर अहम टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा है कि पर्सनल लॉ के नाम पर मुस्लिम महिलाओं समेत सभी नागरिकों को प्राप्त अनुच्छेद 14, 15, 21 के मूल अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता और जिस समाज में महिलाओं की इज्जत नहीं होती उसे सिविलाइज्ड नहीं कहा जा सकता. न्यायालय ने कहा है कि लिंग के आधार पर मूल व मानवाधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता. मुस्लिम पति ऐसे तरीके से तलाक नहीं दे सकता जिससे समानता व जीवन के मूल अधिकार का हनन होता हो. संविधान के दायरे में

दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण न करने का आग्रह करते हुए मुस्लिम समाज से इसका हल तलाशने का आह्वान किया है. पीएम मोदी ने 12वीं सदी के महान समाज सुधारक बसव की जयंती समारोह में शनिवार को कहा, 'समाज के अंदर के लोग ही परंपराओं को तोड़ आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाते हैं. मुझे उम्मीद है कि मुस्लिम समाज से ही लोग आगे आएंगे और तीन तलाक के संकट से जूझ रही मुस्लिम महिलाओं के लिए रास्ता निकालेंगे.' मोदी ने हिंदू समाज से विधवा विवाह को खत्म करने वाले महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय का जिक्र