TRAI ने नेट न्यूट्रैलिटी पर जारी की सिफारिशें

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टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने मंगलवार को नेट न्यूट्रैलिटी के पक्ष में फैसला सुनाया। ट्राई पहले से ही इसके पक्ष में था, पर अब इस फैसले को उसकी अंतिम मुहर माना जा रहा है। फैसले के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों को सभी वेबसाइट और सेवा को एक समान स्पीड देनी होगी। वे किसी वेबसाइट की स्पीड घटा या बढ़ा नहीं सकेंगी।साथ ही टेलीकॉम रेगुलेटर ने कई सुझाव भी दिए हैं।

ट्राई ने नेट न्यूट्रैलिटी पर सुझाव देते हुए लाइसेंस एग्रीमेंट में संशोधन की भी सिफारिश की है। ट्राई का कहना है कि सर्विस प्रोवाइडर सेवा उपलब्ध करवाने में भेदभाव नहीं कर सकता। उसको सबको एक तरह का कंटेट मुहैया करवाना चाहिए। ट्राई के मुताबिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स नेट न्यूट्रैलिटी में शामिल है। कंपनियां स्पीड घटा या बढ़ा नहीं सकतीं।

उपभोक्ताओं को होगा फायदा 
अगर ट्राई नेट न्यूट्रैलिटी का समर्थन नहीं करता तो टेलीकॉम कंपनियां उनसे किसी वेबसाइट के ज्यादा तो किसी के कम डेटा चार्ज वसूलतीं। इससे वाइस कॉलिंग जैसी सेवाएं महंगी होतीं।

कंपनियों को नुकसान होगा
वाट्सएप और स्काइप जैसी सेवाओं से टेलीकॉम कंपनियों की एसएमएस और कॉलिंग सेवा पर असर पड़ रहा है। नेट न्यूट्रैलिटी लागू होने से कंपनियां इन सेवाओं के ज्यादा चार्ज नहीं वसूल पाएंगी। इन्हीं कारणों से ट्राई का फैसला आने के बाद टेलीकॉम कंपनियों के शेयर गिर रहे हैं।

क्या है नेट न्यूट्रैलिटी

नेट न्यूट्रैलिटी (इंटरनेट तटस्थता) वह सिद्धांत है, जिसके तहत माना जाता है कि इंटरनेट सेवा प्रदाता या टेलीकॉम कंपनी को हर तरह के डाटा को एक जैसा दर्जा देना होगा। अलग-अलग वेबसाइट, सेवा या इंटरनेट कॉलिंग के लिए अलग कीमत नहीं वसूली जा सकती है। कंपनियां न किसी सेवा को प्रतिबंधित करें। न किसी की स्पीड घटाएं या बढ़ाएं। इसे यूं समझें कि अलग-अलग ब्रांड की कार से पेट्रोल की कीमत अलग नहीं वसूली जा सकती है।