पूर्व वाइस चांसलर डीएन जौहर ने सरकार से इच्छा मृत्यु मांगी

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पूर्व वाइस चांसलर डीएन जौहर और उनकी पत्नी प्रोफेसर आदर्श जौहर ने अपनी इच्छा मृत्यु (Euthanasia) की वसीयत लिखी. उन्होंने अपनी वसीयत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट चंडीगढ़ को दे दी है. प्रोफेसर चाहते हैं कि जब वे बिल्कुल मरने की स्टेज पर हों और उनके बचने के कोई संभावना न हो तो अस्पताल में जबर्दस्ती लाइफ सपोर्ट पर जिंदा रखने के बजाय उन्हें इच्छामृत्यु दे दी जाए.

डॉ. जौहर ने कहा कि अगर मैं शान से जी रहा हूं, तो ये मेरा अधिकार है कि मैं शान से मौत ले सकूं. उन्होंने कहा कि मुझे तो दवाइयों के नाम भी नहीं पता हैं, इसलिए मैं अपने आखिरी समय में किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता. उनके साथ उनकी पत्नी आदर्श जौहर ने भी पैसिव एथ्यूनेसिया के लिए आवेदन दिया. कोर्ट ने उनकी वसीयत को रिकॉर्ड में ले लिया है. जिला अदालत में मौजूद दंपती ने बताया कि दो पेज के दस्तावेज को तैयार करने में पूरे नौ महीने लग गए हैं. डा. जौहर पूरी तरह से फिट हैं और रोजाना दस घंटे पढ़ाई-लिखाई करते हैं. उन्होंने कहा कि उनके फैसले में उनके बच्चों की स्वीकृति है.

  • पूर्व वाइस चांसलर डीएन जौहर ने सरकार से इच्छा मृत्यु मांगी
  • मैं अपने आखिरी समय में किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता- डीएन जौहर

प्रोफेसर डीएन जौहर आगरा स्थित डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर व पंजाब यूनिवर्सिटी लॉ डिपार्टमेंट के पूर्व चेयरमैन रहे हैं, जबकि प्रोफेसर आदर्श जौहर सेक्टर 11 कालेज की बॉटनी विभाग के विभागाध्यक्ष पद से रिटायर हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज को भी वे पढ़ा चुके हैं. प्रो. जौहर ने कहा- “अब देश में पैसिव एथ्यूनेसिया (इच्छामृत्यु) को लीगल कर दिया है. पैसिव एथ्यूनेसिया एक तरह की वसीयत है, जिसके तहत अस्पताल में अगर मरीज बचने की हालत में नहीं है तो उसकी वसीयत के मुताबिक जिस सपोर्ट सिस्टम से वह जिंदा है, उसे हटा दिया जाता है.