Farmer Protest: सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने जलाईं कृषि कानूनों की प्रतियां

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किसान संगठन तीनों कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। जिसके लिए दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों का 49 दिन से आंदोलन जारी है। बुधवार शाम को लोहड़ी के दिन सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने बताया कि कानून की प्रतियां जलाईं गईं।

किसान समिति ने बताया कि तीन कृषि कानून और बिजली बिल 2020 को रद्द करने की किसानों की मांग पर सरकार का रवैया अड़ियल है। उसके खिलाफ अभियान तेज करते हुए देशभर में 20 हजार से ज्यादा स्थानों पर कृषि कानून की प्रतियां जलाईं गईं। सभी स्थानों पर किसानों ने एकत्र होकर कानून की प्रतियां जलाईं और उन्हें रद्द करने के नारे लगाए।

किसान समिति ने दिल्ली के आसपास 300 किमी के दायरे में स्थित सभी जिलों के किसानों से अपील की है कि वे दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड की तैयारी में जुटें और बॉर्डर पर जमा हों। जहां 18 जनवरी को सभी जिलों में महिला किसान दिवस मनाया जाएगा, वहीं बंगाल में 20 से 22 जनवरी, महाराष्ट्र में 24 से 26 जनवरी, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश में 23 से 25 जनवरी और ओडिशा में 23 जनवरी को महामहिम के कार्यालय के समक्ष महापड़ाव आयोजित किया जाएगा।

एआईकेएससीसी ने कहा कि केंद्र सरकार यह बता पाने में नाकाम रही है कि कैसे ये कृषि कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं जबकि आंदोलन को 50 दिन से ज्यादा हो गए। समिति ने कहा कि केंद्र का ये तर्क कि नए कृषि कानून से तकनीकी विकास, पूंजी का निवेश, मूल्य वृद्धि होगी। लेकिन ये कानून इन कामों की जिम्मेदारी बड़े कॉरपोरेट को देते हैं तो इससे इस कानून का अर्थ नहीं रह जाएगा।