डोगरी भाषा की पहली आधुनिक कवयित्री पद्मश्री पद्मा सचदेव का निधन

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पद्मश्री से सम्मानित डोगरी लेखिका पद्मा सचदेव का 4 अगस्त को निधन हो गया। वह 81 वर्ष की थी।साहित्य अकादमी ने डोगरी कवयित्री, उपन्यासकार एवं साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्य पद्मा सचदेव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। 17 अप्रैल 1940, जम्मू से 40 किलोमीटर दूर एक ऐतिहासिक गाँव पुरमंडल के प्रतिष्ठित राजपुरोहित परिवार में जन्मी पद्मा सचदेव को साहित्य अकेडमी पुरस्कार, सोवियत लैंड पुरस्कार, पद्मश्री सरस्वती सम्मान और साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता से नवाजा जा चुका था।

उन्होंने डोगरी लोकगीतों से प्रभावित होकर बारह-तेरह बरस की उम्र से ही डोगरी में कविता लिखना शुरू किया। उन्हें डोगरी की पहली आधुनिक कवयित्री होने का गौरव प्राप्त था ।उन्होंने कुछ बरस जम्मू रेडियो के अलावा दिल्ली में डोगरी समाचार विभाग में भी कार्यभी किया था। 1969 में प्रकाशित उनके कविता संग्रह ‘मेरी कविता मेरे गीत’ को 1971 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें: डोगरी कविताएँ, तवी ते झँना, न्हेरियाँ गलियाँ (जम्मू-कश्मीर सांस्कृतिक अकादमी से पुरस्कृत), पोटा पोटा निंबल, उत्तरवाहिनी (प्रकाशनाधीन), डोगरी से हिंदी में अनूदित कविता-संग्रह: मेरी कविता मेरे गीत, सबद मिलावा; साक्षात्कार: दीवानखाना; गोद भरी (कहानियाँ)। उन्हें 2016 में 25वें सरस्वती सम्मान से नवाजा गया ।यह सम्मान उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक “चित चेते” के लिए मिला था।

पद्मा सचदेवा के साहित्य में भारतीय स्त्री के हर्ष और विषाद, विभिन्न मनोभावों और विपदाओं को स्थान मिला है। वह निरंतर अपनी भाषा, वर्तमान घटनाओं, त्योहारों तथा भारतीय स्त्री की समस्याओं जैसे ज्वलंत विषयों पर समाचार-पत्रों तथा पत्रिकाओं में लिखती रहीं थीं। उन्होंने डोगरी में आठ कविता-संग्रह, तीन गद्य की पुस्तकें तथा हिंदी में 19 कृतियों की रचना की हैं। इसके अलावा उनकी 11 अनूदित कृतियाँ भी प्रकाशित हैं, जिनमें उन्होंने डोगरी से हिंदी, हिंदी से डोगरी, पंजाबी से हिंदी, हिंदी से पंजाबी, अंग्रेज़ी से हिंदी तथा हिंदी से अंग्रेजी में भी परस्पर अनुवाद किया है। उनकीं अनेक कहानियों को टेलीविजन धारावाहिकों तथा लघु फिल्मों में रूपांतरित किया गया है तथा उनके हिंदी और डोगरी गीतों को व्यवासयिक हिंदी सिनेमा ने भी इस्तेमाल किया।

पद्मा सचदेव को साहित्य अकादमी पुरस्कार के अलावा केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कविता के लिए कबीर सम्मान, सरस्वती सम्मान, जम्मू-कश्मीर अकादमी का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार तथा भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सहित कई पुरस्कार से नवाजा गया था।